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मैनपुरी - जिलाधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्याय ने मदरसा आधुनिकीकरण की बैठक में कहा कि जनपद में संचालित 18 मदरसों में अरबी, उर्दू के साथ-साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को इंग्लिश, विज्ञान, गणित की शिक्षा प्रदान की जाएं, मदरसों में बच्चों को कम्प्यूटर संचालन की भी जानकारी दी जाये, सभी संचालित मदरसों में 03 विषयों के शिक्षकों की तैनाती निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो चुकी है, मदरसों में शिक्षा प्रदान करने वाले स्नातक को 02 हजार एवं परास्नातक को 03 हजार रु. मानदेय का भुगतान किया जा रहा है। केन्द्र से धनराशि प्राप्त होने के उपरांत अवशेष धनराशि का भुगतान भी किया जाएगा, मदरसों के आधुनिकीकरण के बाद मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में काफी बदलाव आया है। 2017 से मदरसा बोर्ड का गठन होने के उपरांत संचालित सभी मदरसों, मदरसों में शिक्षा प्रदान कर रहे स्टाफ का पूरा विवरण मदरसा बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है।
           श्री उपाध्याय ने जानकारी करने पर पाया कि जनपद में संचालित सभी मदरसे वित्तविहीन है, संचालित मदरसों में कुछ आवासीय मदरसे हैं, जिनमें बच्चे रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने मदरसा संचालकों से जानकारी करने पर पाया कि कक्षा 01 से 05 तक तैतानियां, कक्षा 6 से 8 तक फोकानियां, कक्षा 09-10 तक की शिक्षा प्राप्त करने पर आलिया एवं कक्षा  11-12  तक की शिक्षा प्राप्त करने पर उच्चालिया का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। हाईस्कूल स्तर तक मुंशी, मौलवी, इंटर पर आलिम, स्नातक पर कामिल, परास्नातक पर फाजिल की डिग्री प्रदान की जाती है। उन्होंने पाया कि जनपद में मदरसा बोर्ड के तहत एक मिनी आईटीआई भी संचालित है, जिसमें 03 ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 
         जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी यश वर्मा ने बताया कि संचालित मदरसा को सहायता प्रदान करने हेतु गत वर्ष तक भारत सरकार द्वारा 80 प्रतिशत एवं राज्य सरकार द्वारा 20 प्रतिशत अनुदान दिया जाता था, इस वर्ष से केन्द्राश घटाकर 60 प्रतिशत एवं राज्यांश बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। बैठक में जिला विकास अधिकारी प्रवीन कुमार राय के अलावा मदरसा संचालक आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्ट- कैलाश गुप्ता 

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