हिंदुस्तान का शायद ही कोई ऐसा कोना हो जहाँ लोग खास धरोहरों सहित अशोक स्तम्भ के बारे में न जानते हों,
जनपद बहराइच में जिला कांग्रेस कमेटी की उदासीनता के कारण आज दशको पूर्व निर्मित अशोक स्तंभ को कुछ लोगों ने तोड़ दिया जबकि इसकी जानकारी कई बार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को स्थानीय दुकानदारों ने दी फिर भी जिला कांग्रेस कमेटी सहित अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों ने इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जिसका खामियाजा आज अशोक स्तंभ को उठाना पड़ा अशोक स्तंभ हमारी एक ऐतिहासिक पहचान रखता है कुछ लोग इसको हटाकर धन कमाने में लगे हुए हैं।
आपको बता दें कि यह मामला नगर क्षेत्र के कांग्रेस भवन स्थित मुख्य द्वार पर स्थापित अशोक स्तंभ का है जिसमें एक स्तंभ तो पहले ही गंदी राजनीति की चिता व भाषणों के सौदागरों की गिरफ्त में आकर विलीन हो गया और अब दूसरे स्तंभ की बारी आ गयी।
कु़छ लोग विगत वर्षों से धीरे-धीरे इसकी पहचान खत्म करने में लगे हुए थे यह ऐतिहासिक धरोहर अशोक स्तम्भ के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी जब संकल्प फाउण्डेशन को हुई तो अशोक स्तम्भ का जीर्णोद्धार करने का दायित्व अपने ऊपर लेते हुये एक शिलापट भी अशोक स्तम्भ के नीचे लगायी जिससे अवशेष बचे और अशोक स्तम्भ की सुरक्षा की जा सके व निकट भविष्य में उसका सौन्दर्यीकरण करके उसे उचित सम्मान दिलाया जा सके।
यह बात बहुत लोगों को अखरती रही जिसको लेकर बहुत दिनों तक कांग्रेस भवन में राजनीति चलती रही जिसके बावजूद बीती रात अशोक स्तंभ इन राजनीत कारों की भेंट चढ़ गया पहले इस अशोक स्तंभ में लगे शिलापट्ट को हटाया गया फिर अशोक स्तंभ को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
हिंदुस्तान का शायद ही कोई ऐसा कोना हो जहाँ लोग खास धरोहरों सहित अशोक स्तम्भ के बारे में न जानते हों, बाउजूद देश की राजनीति में भाषण बाजीे ज्यादा व काम कम करने से जिले की तमाम ऐतिहासिक धरोहरों के साथ साथ हिन्दुस्तान की पहचान में शामिल अशोक स्तम्भ भी आपसी द्वेष व राजनीतिक उपेच्छा का शिकार होकर रह गया।
इस सम्बन्ध में जब जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष चन्द्रशेखर सिंह आजाद से पूछा गया कि अशोक स्तम्भ कब और किसने निर्माण करवाया था तो उन्होने कहा कांग्रेस भवन निर्माण के समय ही दोनो स्तम्भ बनवाया गया था और यह अशोक स्तम्भ ऐतिहासिक चिन्ह ही हमारी धरोहर है इसलिए गेट के दोनो ओर उसका निर्माण करवाया गया था जिनमेें से एक स्तम्भ विगत कुछ वर्षो पहले ही भेट चढ़ चुका था।
रिपोॅट- राज कुमार श्रीवास्तव
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