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लेखक और स्तंभकार लॉर्ड मेघनाद देसाई ने लिखा है कि आज भारत में तर्कपूर्ण बहस करना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा नोटबंदी आदि बातों का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि आज के वक्त में नरेंद्र मोदी के हर काम को गलत और फासीवादी बताया जाता है। मेघनाद देसाई ने मोदी द्वारा की गई नोटबंदी को ‘कठोर’ कदम बताते हुए लिखा कि इससे काला धन चाहे ना आया हो लेकिन काला धन छिपाकर रखने वालों को यह जरूर समझ आ गया कि सरकार जब चाहे उनके काले धन को बेकार कर सकती है।मेघनाद देसाई ने एक किस्से का जिक्र भी किया। देसाई ने लिखा कि उनके एक दोस्त ने एक बार उनसे पूछा था कि क्या मैं फासीवादी नोटबंदी का समर्थन करता हूं? मेघनाद देसाई इसपर लिखते हैं कि वह समझ नहीं पाते कि नोटबंदी फासीवादी कैसे हो गया? मेघनाद देसाई लिखते हैं कि इन दिनों मोदी द्वारा उठाया गया कोई भी कदम गलत, फासीवादी और तानाशाह रवैये वाला है।मेघनाद देसाई ने अपने लेख में मनमोहन सिंह का भी जिक्र किया है। मेघनाद देसाई ने लिखा कि मनमोहन सिंह ने कहा कि इस बार जीडीपी में दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जाएगी। लेकिन अपनी बात को सही ठहराने के लिए उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया था। मेघनाद देसाई ने लिखा कि मनमोहन सिंह ने यह बात किसी अर्थशास्त्री की तरह नहीं बल्कि एक राजनेता की तरह कही। मेघनाद देसाई ने संसद के शीतकालीन सत्र का भी जिक्र किया। मेघनाद देसाई ने कहा कि विपक्ष चाहता तो उस वक्त में नोटबंदी के फायदे-नुकसान के बारे में अच्छे से बहस कर सकता था लेकिन वह वक्त भी यूं ही गंवा दिया गया। मेघनाद देसाई के मुताबिक, विपक्ष के नेताओं ने असल में किसी तरह का आकलन नहीं किया था और उन लोगों के आलकन करने का तरीका या पैमाना मोदी से नफरत था। साथ ही विपक्षियों के पास अर्थशास्त्र का भी कम ज्ञान था।मेघनाद देसाई सभी पुराने नोटों के बैंकों में वापस आ जाने को सफलता मानते हैं। लेकिन उन्होंने यह भी लिखा कि नए नोटों को लोगों तक पहुंचाने के लिए जो मैनेजमेंट किया गया उसमें खामियां थीं। मेघनाद देसाई ने लिखा कि नोटबंदी के दौरान कई लोगों को परेशानी हुई लेकिन वैसी परेशानियां तो तब भी होती हैं जब लोगों को बेरोजगारी में दिन बिताने पड़ते हैं। देसाई ने लिखा है कि पत्रकारों और नेताओं को लोगों की परेशानी का अंदाजा नहीं है इसलिए बार-बार यह दिखाते हैं कि गरीब आदमी लाइन में खड़ा है और उसे कुछ नहीं मिल रहा। देसाई ने आगे लिखा कि लाइन लगना अच्छा था क्योंकि इससे पहले मनमोहन सिंह के नव-उदारवादी आर्थिक सुधारों की वजह से मिडिल क्लास को गरीबों के साथ खड़ा कर दिया गया था।

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