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लखनऊ।  चीन व अमेरिका के बीच बढ़ता शीत युद्ध यूपी के लिए खास अवसर लेकर आया है। चीन से कारोबार समेटने वाली या वहां इसे और विस्तार न देने की इच्छुक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए यूपी सरकार ने खास रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत प्रदेश के एमएसएमई व निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह अमेरिका की 100 से ज्यादा बड़ी कंपनियों से बातचीत कर चुके हैं। वह दक्षिण कोरिया की भी तमाम कंपनियों के संपर्क में है।

उद्योग व निवेश के जानकारों का कहना है कि शीघ्र ही इसके परिणाम जमीन पर दिखने लगेंगे। इससे यूपी में रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। कोरोना संकट से पैदा हुई स्थितियों से भी निपटने में मदद मिलेगी। चीन व अमेरिका के खराब हुए रिश्तों के बीच चीन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करने वाली बड़ी कंपनियां या तो वहां से हटने की योजना बना रही हैं या फिर वहां अपने कारोबार को विस्तार देने की इच्छुक नहीं है। वे वियतनाम, थाईलैंड या भारत में संभावनाएं तलाश रही हैं। इसी को देखते हुए अधिकाधिक निवेश लाने के लिए यूपी सरकार ने पहल कर दी है। सिद्धार्थनाथ ने यूएस इंडिया स्ट्रेटजिक पाटर्नरशिप फोरम के माध्यम से अमेरिका की कंपनियों के प्रतिनिधियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संवाद किया।

इसमें एडोब कंपनी के प्रतिनिधि रोहन मित्रा ने प्रदेश में एडोब प्लांट की क्षमता बढ़ाने की योजना बताई। मास्टर कार्ड के प्रतिनिधि ने ग्रामीण क्षेत्रों के किरानों की दुकानों में डिजिटल पेमेंट की सुविधा उपलब्ध कराने की बात की है।

दुनिया की दो अग्रणी लॉजिस्टिक कंपनी यूपीएस और फ्रेडिक्स ने जेवर एयरपोर्ट पर लॉजिस्टिक सेंटर बनाने में निवेश की सहमति दी। 'बोस्टन' ने मेडिकल इक्विपमेंट प्लांट लगाने की पेशकश की। वहीं, कोरियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पार्क ने भी कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज को यूपी में लाने की इच्छा जताई।

संपादक, संजय शुक्ला 
     पी न्यूज चैनल।

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