कुशीनगर- भारत की कुम्हारी कला जो प्राचीन समय से ही इस कला को इन्जीनियरिंग का दर्जा दिया जाता है, भारत के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों में दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें मिट्टी के दिए और बर्तनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है मिट्टी के बर्तनों को अपने कला के द्वारा बनाता है और इनके द्वारा बनगे गए मिट्टी के दियो से दीपावली के दिन घरों को सजाने में की जाती है जो इस समय यह कला विलुप्त होता जा रहा है, सरकार द्वारा कुम्हारों के दशा और इनके कुम्हारी कला को आगे बढ़ाने के लिए कुम्हारों को पट्ठे पर जमीन आदि देने के लिए घोषणाएं करती हैं लेकिन आधुनिक युग में बिजली और चाइनीज सामानों के जगमगाहट ने इनके कुम्हारी कला पर लगाम लगा दिया है तथा इनके सामने रोजी रोटी के लाले पड़े हुवे हैं, जबकि भारत के मिट्टी के कला को इंजीनियरिंग का दर्जा देने के लिए जरूरत है जिससे करोड़ों कुम्हार जातियों के लोगों को रोजगार मिल जाता इनके हुनर को सजाने और सवारने की जरुरत है .
रिपोर्ट - वीरेन्द्र गुप्ता
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