बहराइच - भले ही योगी सरकार आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को देने दावा करती हो पर धरातल पर सभी दावें हवा हवाई ही साबित हो रहे हैं । अपने कारनामों के चलते चर्चा में रहने वाले बहराइच के स्वास्थ्य विभाग का ताजा मामला फिर सुर्खियों में छा रहा है। दावो से जुदा हकीकत का नजारा कैमरे में कैद हुआ। बेटी की बीमारी को देखकर लाचार पिता ने कई बार एंबुलेंस सेवा पाने के लिए फोन किया लेकिन घण्टों एम्बुलेंस का इंतजार करने के बाद भी जब मौके पर एंबुलेस नही पहुंची तो बेटी की हालत बिगड़ता देख लाचार पिता व अन्य परिजन मरीज को ठेले पर लादकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। हद तो तब हो गई जब मरीज का इलाज करने के बाद उसे चिकित्सकों ने मरीज को घर ले जाने के लिए कहा। फिर परकजनों ने एंबुलेंस सुविधा के लिए फोन किया लेकिन हालात जस के तस रहे और उसी ठेले पर मरीज को फिर लादकर वापस घर की ओर रवाना हुए। लगातार मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर आखिर क्यों शासन मेहरबान है ये बात सभी की समझ से परे है। इतना बड़ा मामला मामले में कोई जिम्मेदार अधिकारी बोलने को तैयार नही है। 60 वर्षीय कैलाश की बेटी की तबियत अचानक खराब होने पर एक परिवार ने सबसे पहले एम्बुलेंस के लिए कई बार फोन मिलाया हर बार जल्द ही एंबुलेंस मौके पर पहुंचने का अश्वासन दिया जाता रहा लेकिन जब घण्टों इंतजार करने के बाद भी एम्बुलेंस नही पहुँची। रात अधिक होने के चलते न तो रिक्शा दिख रहा था न कोई अन्य साधन। बेटी की तबियत ज्यादा बिगड़ती देख लाचार पिता ने उस ठेले पर बेटी को लादा जिस पर वो रोजमर्रा का सामान बेंचकर परिजनों का पालन पोषण करता है। ठेले पर बेटी को लेकर रवाना हुए परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। मौके पर मौजूद चिकित्सकों ने मरीज का इलाज किया और उन्हे मरीज को घर ले जाने की सलाह दी। वापस बीमार बेटी को घर ले जाने के लिए फिर एम्बुलेंस की सेवा नही मिल सकी। इसके बाद मजबूर पिता शासन की योजनाओं को कोसते हुए अपनी उसी ठेलिया पर उसे लादकर घर ले जाने पर मजबूर हुआ।
रिपोर्ट- राज कुमार
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