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लखनऊ - बर्बादे गुलिस्ता करने को बस एक ही उल्लू काफी है,
              अंजाम-ए-गुलशन क्या होगा ? हर शाख पर उल्लू बैठा है. 
फ़िलहाल ये लाइनें हम उन खाद्य रसद अधिकारियों को समर्पित कर रहें, जो इंसान होकर के उल्लू बने बैठे हैं. या ऐसा भी कह सकते हैं कि ये कोटेदारों को उल्लू बना रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि कोटेदार भी जनता को उल्लू बनायें, यह सब कुछ कर के अधिकारी अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं. फिलहाल टॉपिक पर आते हैं.
आज जनसुनवाई पोर्टल पर सबसे ज्यादा शिकायतें कोटेदारों के अनियमितता के सन्दर्भ में आती हैं, अमूमन जनता उन्हें ही दोषी समझ बैठती है लेकिन सच्चाई कुछ और ही है. अधिकारी अपना पेट भरने के चक्कर में कोटेदार के पेट काटता है तब कोटेदार क्या करेगा ??? 
हमारी टीम की एक विशेष ख़ुफ़िया रिपोर्ट में सरकार के नाक के नीचे लखनऊ में ही भ्रष्टाचार का बड़ा पुलिंदा खुला, आश्चर्य यह है कि राजधानी में ही खाद्य रसद अधिकारियों द्वारा कोटेदारों का शोषण जारी है और अधिकारी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं.  
बताते चलें की कोटेदारों को प्रति कुंतल 70 रुपये कमीशन मिलता है जो उनकी कमाई है, उसी में दुकान का किराया देना है, तौलमैन को देना है, बिजली बिल और तमाम ताम झाम करने हैं. 
बात लखनऊ के राजाजी पुरम स्थित माल गोदाम कि करें तो अब 2 महीने से खाद्यान्न की विपणन शाखा ने कोटेदारों पर प्रति कुंतल 42 से 52 रुपये भाड़ा लगा दिया है. यानी अगर प्रति कुंतल कोटेदार 50 रुपये भाड़ा देता है तो उसका प्रति कुंतल मात्र 20 रुपये बचेगा. अगर कोई कोटेदार 200 कुंतल राशन वितरित करता है तो 200x20 यानी सिर्फ 4000 रूपये उसे बचेगा. अब आप सोचिये कि अगर कोटेदार को महीने में 4000 बचेगा तो वह दुकान का किराया क्या देगा ? तौलमैन को क्या देगा ? बिजली बिल और जरुरी खर्च कैसे करेगा ? और सबसे बड़ी बात कि अपनी आजीविका कैसे चलायेगा ??? 
यानी कुल मिलाकर नंगा नहायेगा क्या और निचोड़ेगा क्या, वाली हालात है. 
क्या अधिकारियों को यह पता नहीं है कि 20 रुपये कुंतल बचने के बाद कोटेदार का खर्च कैसे चलेगा ? यानी अधिकारी चाहते हैं कि कोटेदार राशन ब्लैक करे, घटतौली करे. "पी न्यूज़" चैनल के संवाददाता ने कई कोटेदारों से इस सन्दर्भ में बात की, कोटेदारों ने कहा कि इसी तरह रहा तो हम सड़क पर आ जायेंगे और भीख मांगना पड़ेगा, कोटेदारों पर भ्रष्टाचार करने के लिए यह अधिकारियों द्वारा दबाव डाला जा रहा है. 
हमारे संवाददाता ने खाद्यान्न एवं विपणन से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण अधिकारियों से बात करने की कोशिश लेकिन किसी ने किसी और अधिकारी पर थोप कर किनारा कर लिया तो किसी अधिकारी का फोन ही नहीं लग पाया. फ़िलहाल हम इस पर सभी अधिकारियों का आधिकारिक बयान भी लेंगे उनसे उनकी जवाबदेही भी पूछेंगे. सरकार कि नाक के नीचे इतना बड़ा खेल चल रहा है और उन्हें भनक तक नहीं. सिस्टम में बैठे कुछ इसी तरह के उल्लू हैं जो पूरे सिस्टम को भ्रष्ट बनाते हैं. 
 
"पी न्यूज़ डिजिटल डेस्क"
          लखनऊ 
 फोन - 0522,2713922

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