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 बिहार में गरीबी उन्मूलन की योजनाएं धीमी रफ्तार से चल रहीं हैं। धीमी रफ्तार कई अन्य स्कीम की भी हैं जो मुख्य रूप से केंद्र प्रायोजित या केंद्रीय प्रक्षेत्र की योजनाओं का हिस्सा हैं। चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने केंद्र प्रायोजित एवं केंद्रीय प्रक्षेत्र की योजनाओं के लिए जो आवंटन किए उसके मुताबिक राशि रिलीज नहीं की। सबसे अधिक प्रभावित प्रधानमंत्री आवास योजना हुई है। सूबे में करीब 25 लाख बेघरों को आवास मुहैया कराना है, और ठंड के इस मौसम में उन्हें खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारनी पड़ रही है।केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए चालू वित्त वर्ष में 4154.60 करोड़ रुपये देने थे, परन्तु पिछले माह तक केवल 602.57 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। यह राशि पहली तिमाही में मिली है और उसके पश्चात केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए अपने हिस्से की कोई राशि नहीं दी है। केंद्र सरकार को 60 प्रतिशत राशि देनी है और इसके समय पर नहीं मिलने के कारण राज्य सरकार भी शेष 40 फीसद की मैचिंग ग्रांट रिलीज नहीं कर पाई है। योजना के तहत 25 लाख बेघरों में से फिलहाल 6.37 लाख को 31 मार्च, 2018 तक आवास उपलब्ध कराना है। परन्तु रफ्तार यह है कि अबतक लगभग 200 आवासों का ही निर्माण पूरा हो सका है। ग्रामीण विकास विभाग ने इस लक्ष्य का 75 फीसद यानी करीब 4.5 लाख आवास का निर्माण 31 मार्च, 2018 तक पूरा करने की पहल की है। गौर करने वाली बात यह है कि 6.37 लाख का यह लक्ष्य पिछले वित्तीय वर्ष का है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष के 4.36 लाख आवास के निर्माण की दिशा में अभी पहल नहीं हुई है। इसी प्रकार गरीबी उन्मूलन की दूसरी बड़ी योजना मनरेगा के लिए 1503 करोड़ इस वित्तीय वर्ष में मिलने थे। अब जबकि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति में लगभग तीन माह बाकी हैं, केंद्र सरकार ने सिर्फ 437.22 करोड़ रिलीज किए हैं। मनरेगा की बकाया राशि भी नहीं मिल पाई है।  राज्य सरकार ने पूर्व के बकाया 2,100 करोड़ रुपये का भी भुगतान करने का अनुरोध किया था मगर अबतक यह बकाया राशि भी नहीं मिली है। इसके कारण मनरेगा का कार्यान्वयन प्रभावित हो रहा है। इसी प्रकार गरीबी उन्मूलन की दूसरी बड़ी योजना मनरेगा के लिए 1503 करोड़ इस वित्तीय वर्ष में मिलने थे। अब जबकि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति में लगभग तीन माह बाकी हैं, केंद्र सरकार ने सिर्फ 437.22 करोड़ रिलीज किए हैं। मनरेगा की बकाया राशि भी नहीं मिल पाई है।  राज्य सरकार ने पूर्व के बकाया 2,100 करोड़ रुपये का भी भुगतान करने का अनुरोध किया था मगर अबतक यह बकाया राशि भी नहीं मिली है। इसके कारण मनरेगा का कार्यान्वयन प्रभावित हो रहा है। केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी भी अबतक पूरी की पूरी नहीं मिल सकी है। कुल 1261.45 करोड़ रुपये इस वित्तीय वर्ष में मिलने हैं। इसके विरूद्ध अबतक इसकी आधी राशि भी नहीं मिल सकी है। कुल 549.27 करोड़ ही पिछले माह तक मिले हैं।  ग्रामीण सड़कों के निर्माण में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना(पीएमजीएसवाई) का बड़ा योगदान है। करीब दस हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों के निर्माण के लिए डीपीआर केंद्र की मंजूरी के लिए भेज गए हैं। केंद्र सरकार ने 2017-18 के लिए बजट में 3300 करोड़ रुपये का प्रावधान कर रखा है। परन्तु इस योजना में सिर्फ 20.59 करोड़ ही मिल पाए हैं। 

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