लखनऊ - प्रदेश में जैसे जैसे सरकार पुरानी होती जा रही वैसे वैसे सरकार के चाल-चरित्र की कलई खुलती जा रही है, आम जनता में यह भरोसा था की योगी सरकार किसानों के हित में होगी और कर्जमाफी से प्रदेश के किसानो को काफी राहत मिलेगा, लेकिन नजारा ठीक उल्टा ही देखने को मिल रहा है . और यह कहा जा सकता है की योगी सरकार भी अखिलेश के नक्शेकदम पर चल रही या ऐसा भी कह सकते हैं की उनसे 1 कदम आगे ही है . बताते चलें की योगी सरकार ने किसानों से उनके कर्जमाफी का वादा किया था और उसी बल पर सरकार कुर्सी पर काबिज भी हुई, फिर बाद में सरकार ने निर्णय लिया की किसानों के 1 लाख तक के ऋण माफ़ किये जायेंगे, फिलहाल यह भी ठीक ही था , लेकिन सरकार ने निर्णय के 3 महीने बाद आधी अधूरी तैयारियों के बीच कर्जमाफी सर्टिफिकेट भी बाँटना शुरू कर दिया , और परिणाम यह की किसी को 9 पैसे तो किसी को 1 रूपये की कर्जमाफी हुई है . किसी को 200 , किसी को 300 का प्रमाण पत्र मिला है . क्या कहेंगे आप ? यह किसानों का मजाक नहीं तो क्या है ? क्या अधिकारी अंधे हैं या सरकार पागल हो गई है ?
यही कारनामा अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुवा था जब प्रदेश में सूखा राहत की राशि बंटनी थी. मीडिया में खूब प्रोपोगंडा हुआ और परिणाम ? ढाक के तीन पात .. सूखा राहत में किसी किसान को 25 रूपये का चेक मिला तो किसी को 50 का, और बहुतेरे किसान तो आज तक भी लेखपालों से पैरवी कर रहे हैं . फ़िलहाल योगी सरकार उनके पाले को पार गई और अधिकारीयों ने 9 पैसे तक के प्रमाण पत्र मंत्रियों के हाथ बंटवा दिए . सरकार का यह मजाक किसानो के लिए बेहद पीड़ादायक है , सरकार को इसके लिए माफ़ी मांगनी चाहिए . योगी सरकार से इस तरह के जल्दबाजी की उम्मीद नहीं थी और न ही अधिकारियों से इतनी लापरवाही की, लेकिन अब लगता है की योगी भी ठन्डे पड़े हैं और अधिकारी भी . किसानों के कर्जमाफी से ज्यादा उनका भाडा-किराया और लेखपाल तहसीलदारों के चाय-पानी में खर्च हो गया . सरकार के इस तरह के आपाधापी भरे कदम सरकार के घबराहट झलकाती है , सरकार को चाहिए की पूरी तैयारी के साथ ही योजनाओं को धरातल पर लाये , अन्यथा इसके दुष्परिणाम से बचा नहीं जा सकता . \
लेखक "पी न्यूज़" ग्रुप के चेयरमैन व एंटी करप्शन हेल्पलाइन के संस्थापक हैं.

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