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सुजानगंज - अन्नपूर्णा धाम प्रेमकापूरा में चल रहे श्रीराम कथा के छठें दिन अयोध्या से पधारी सुश्री किशोरी वर्षा जी ने राम वनगमन प्रसंग सुनाया । श्री किशोरी ने मन्थरा और कैकई  प्रसंग सुनाते हुए कहा कि देवताओं ने अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिये युवराज बनने वाले राम को जंगल की राह दी । इन्द्र आदि देवताओं के अनुरोध पर सरस्वती जी ने मंथरा और कैकई की बुद्धि फेर दी । श्री किशोरी जी ने रहस्य बताते हुये कहा कि जग कल्याण के लिये कैकई माता ने इतना बड़ा कलंक अपने मस्तक पर स्वीकार किया । दशरथ के बार बार समझाने पर भी कैकई अपने दोनो वरदान से हटी नहीं और भगवान ने भी माता पिता की आज्ञा मानकर वन जाना स्वीकार किया । राम वन गमन का करूण प्रसंग सुनाते श्री किशोरी जी भावुक हो उठी । इस समय माहौल इतना गमगीन हो उठा कि श्रोता अपने आप पर काबू नहीं रख सके और पूरे अन्नपूर्णा धाम के पाण्डाल में आंसुओं का सैलाब बह चला । कुछ समय तक बिलकुल सन्नाटा पसरा रहा और केवल सिसकियां सुनाई पड़ रही थी इसके बाद किशोरी जी ने किसी तरह कथा को आगे बढ़ाया और भगवान के श्रृंगवेरपुर पहुँचने तक का वर्णन किया फिर कथा को विश्राम दिया । कथा के दौरान पूरा पाण्डाल खचाखच भरा हुआ था । आयोजकों ने बताया कि कथा का कार्यक्रम मंगलवार को सम्पन्न होगा ।

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