विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण का वृहद कार्यक्रम चलाया गया। प्रशासन की कई टीमों को लगाकर नाम जोड़ने व काटने की कार्यवाही की गई। आलम यह है कि चुनाव के समय जब घर-घर मतदाता पर्ची बांटी जा रही है तो हर लोकसभा व विधानसभा में मतदाता रहे कई लोग अबकी वंचित हो गए। आखिर मतदाता पहचान पत्र होने के बाद भी सूची में नाम गायब होने के बाद उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि वे क्या करें।मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए जनपद के प्रत्येक बूथों पर एक-एक बीएलओ को तैनात कर नाम जोड़ने व काटने का काम किया गया। इसके लिए डोर-टू-डोर कार्यक्रम चलाया गया। बूथ लेबिल आफिसर के साथ सेक्टर मजिस्ट्रेट भी लगाए गए। कई माह तक यह वृहद कार्यक्रम चलता रहा। इसका आलम अब विधानसभा चुनाव में दिख रहा है।आयोग के निर्देश पर जब बीएलओ घर-घर पहुंचकर मतदाताओं को मतदाता पर्ची का वितरण कर रहे हैं तो पता लग रहा है कि जिस परिवार में लोग कई दशक से मतदान करते आए हैं और घर ही रहते हैं वे भी इस बार मतदाता सूची से बाहर हैं।

Post a Comment