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लख़नऊ! जी हां ग्राम- भैसामाऊ,  परगना- महोना, तहसील- बख्शी का तालाब में जहां अधिग्रहित जमीन पर अख्तर एवं मोनू सिंह व अन्य द्वारा आरआर  कॉलेज के सामने अवैध निर्माण की प्रक्रिया लगातार चल रही थी, जिसमें न्यायालय में विहित प्राधिकारी लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण को पत्र प्रेषित किया जा चुका है, जिसमें अधिनियम की धारा 28(1) के अंतर्गत अनाधिकृत निर्माण को रुकवाने  संबंधित  दिशा निर्देशित करने का आदेश /आग्रह किया गया है! जिसमें थाना अध्यक्ष बख्शी का तालाब लखनऊ को इस आशय के साथ सूचित किया गया है कि, अधिनियम की धारा 28(2) के अंतर्गत अनाधिकृत निर्माण कार्य को रुकवा कर  अवगत करना सुनिश्चित किया जावे!

इसी क्रम में न्यायालय विहित प्राधिकारी द्वारा कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जा चुका है  जिसमें दिनांक 20 /01/ 2020 को लखनऊ विकास प्राधिकरण बनाम/ श्री अख्तर एवं मोनू सिंह व अन्य को उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम 1973  की धारा 27  धारा के अधीन नोटिस जारी किया गया था! जिसमे कहा गया था कि,  उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम 1973 की धारा 14 के आदेशानुसार विकास प्राधिकरण की अनुज्ञा प्राप्त किए बिना आरआर कॉलेज के सामने श्री अख्तर एवं मोनू सिंह व अन्य द्वारा अवैध निर्माण कर रहे हैं | दिनांक 28/ 01 /2020 को समय 3:00 बजे कारण बताओ नोटिस के तहत निर्माण/कंस्ट्रक्शन को न किया जावे! लेक़िन विपक्ष द्वारा लगभग 8 बीघा क्षेत्रफल में विकास कार्य करते हुए और प्लाटिंग इत्यादि किया जा रहा है तथा पक्ष द्वारा स्थल पर कोई स्वीकृत तलपट मानचित्र भी नहीं दिखाया गयाहै, निर्माणकर्ता द्वारा अवैध निर्माण के विरोध में उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 1973 की धारा 27, 28 के अंतर्गत कार्यवाही प्रस्तावित की गई है! इसके साथ ही आपका ध्यान एक्ट अधिनियम की धारा 26 की (1) कि और भी दिलाया गया है जिसमें धारा 14 के अधीन विकास प्राधिकरण की आज्ञा के बिना कोई भी निर्माण कार्य करने के लिए अर्थ दंड के भागी हो सकते हैं जो 50,000 तक हो सकता है, और जारी रहने वाले अपराध की दशा में अतिरिक्त ₹2500 प्रतिदिन का जुर्माना दोष सिद्ध के पश्चात जारी रह सकता है!

उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के द्वारा 1973 की धारा 27(1) एवं 28(1) के अंतर्गत कार्यवाही प्रस्तावित किया गया है, जिसमें अभी पुलिस प्रशासन द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी हैं! इसे प्रशासन की लापरवाही मानी जाए या मिलीभगत.. ?
उक्त प्रकरण में अब एलडीए ने दुबारा नोटिस जारी की है, प्राधिकरण की सख्ती और मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के वावजूद प्रापर्टी डीलर व विल्डर लगातार नई नई अवैध कालोनिया  विकसित करने में लगे हुए हैं, अब देखना ये है की सरकार कहाँ और कब तक इनके ऊपर लगाम लगा पाता है!
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