बाराबंकी -आकर्षक और सौन्दर्य का प्रतीक करीब दो सौ साल पुराना विशाल श्री राम जानकी प्रचीन मन्दिर आज देख रेख व मरम्मत के अभाव में खण्डहर का रुप ले चुका है अपने पुराने वजूद को तलाश रहा ये गगनभेदी मंदिर की आगोश में कई ऐतिहासिक यादे जुड़ी है।जिला मुख्यालय से 22 व महादेवा से 14 किलोमीटर दूर विकास खण्ड रामनगर के ग्राम हसनापुर में यह मन्दिर आज भी आस्था का प्रमुख केन्द्र बना है। कई बीघा क्षेत्रफल में बनी इसकी इमारत पर करीब 70 फिट उंचे आलीशान शिखर को लिये ये मन्दिर मानो आसमान भेद रही हो। दो सौ साल पुरानी है मन्दिर गांव के सबसे बुजुर्ग 80 वर्सीय वीरेष्वर सिंह कहते है की उनके पुर्खे कहा करते थे की ये मन्दिर 1815 में धरम पताका माधव सिंह ने उस जमाने में चांदी के 85 हजार रुपया खर्च करके इसका भव्य निर्माण कराया था ।इनको कोई औलाद नही थी । इस नाते अपनी सारी प्रापर्टी इसी मन्दिर के नाम कर दी थीं।52 जोड़ी खूबशूरत दरवाजे लगे है*मन्दिर के चारे तरफ विशालकाय कुल 52 दरवाजे है। जो नक्काशी के हुनर से सराबोर है जिसके अन्दर आकर्षक डिजाईनिंग तरासी गयी है। दिवाले अपने सौन्दर्य की आभा में आज भी चार चांद लगा रही है छत,दिवारों में दरारे, टूट गये दरवाजे मन्दिर की नींव धीरे धरे खोखली हो गयी है दिवारे ककरी की मानिंद चिटक कर खतरे का संकेत दे रही है । खिड़की दरवाजे अधिक तर टूट गये है प्लास्टर गिर रहा है ऐसी हालत में इसकी मरम्मत किसी एक के बस की बात नही है। गांव के उमेष सिंह, राजा सिंह आदि कहते है की इस प्राचीन धरोहर को अगर पुरातत्व विभाग और प्रशासन इस पर अपनी नजरे इनायत कर दे तो बाहरी लोगो के लिये ये पर्यटक स्थल के रुप में विकसित किया जा सकता है।
रिपोर्ट -निजामुद्दीन हाशमी
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