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अभी तक देश 13,540 करोड़ के पीएनबी महाघोटाले के झटके से उबरा भी नहीं है कि चेन्नई की एक ज्वैलरी कंपनी कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड (केजीपीएल) का 824.15 करोड़ रुपये का बैंकिंग कर्ज घोटाला सामने आ गया है। सरकारी और गैर सरकारी 14 बैंकों से कर्ज लेने के लिए फर्जी दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट का इस्तेमाल किया गया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआइ) के इस घोटाले की सीबीआइ से जांच की मांग के बाद सीबीआइ ने एफआइआर दर्ज कर ली है। हीरा व्यापारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की ही तरह केजीपीएल के मालिक भूपेश कुमार जैन व उसकी पत्नी नीता जैन विदेश भाग चुके हैं। कर्ज देने वाले बैंकों ने बुधवार को कहा कि वे कंपनी के मालिक जैन दंपती से संपर्क नहीं कर पाए हैं। माना जा रहा है कि वे अभी मॅारीशस में हैं। 14 बैंकों के संघ की ओर से एसबीआइ की शिकायत पर सीबीआइ ने मामले में बुधवार को एफआइआर दर्ज कर ली है। जांच एजेंसी ने कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर निदेशक भूपेश कुमार जैन, निदेशक नीता जैन, तेजराज अच्छा, अजय कुमार जैन और सुमित केडिया समेत अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
एसबीआइ ने अपनी शिकायत में कहा कि सोने के गहने बनाने वाली कनिष्क गोल्ड का बिक्री करने के ब्रांड का नाम 'क्रिज' है। लेकिन वर्ष 2015 में उसने बिजनेस मॉडल बी2बी (बिजनेस टु बिजनेस) अपना लिया। और बड़े पैमाने पर रिटेल ज्वैलर बना गया। वर्ष 2008 में एसबीआइ ने कर्ज खाता आइसीआइसीआइ बैंक से टेकओवर कर लिया। मार्च 2011 में उसकी बैंकिंग प्रणाली बहुआयामी बैकिंग प्रणाली बन गई। एसबीआइ का आरोप है कि 824.15 करोड़ के कर्ज पर सिक्योरिटी केवल 156.65 करोड़ रुपये की है। एसबीआइ ने कनिष्क गोल्ड पर दस्तावेजों में फेरबदल और रातोंरात दुकान बंद करने का आरोप लगाया है। इसकी जानकारी सबसे पहले एसबीआइ ने 11 नवंबर 2017 को रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआइ) को दी। जनवरी तक दूसरे बैंकों ने भी रेग्युलेटर को धोखाधड़ी के बारे में बताया।
सीबीआइ अधिकारियों ने कहा कि उन्हें शिकायत मिल गई है और वह बैंक के संपर्क में हैं। शिकायत में कई कमियां हैं इसलिए वह इसे बैंक से स्पष्ट कर रहे हैं। सीबीआइ ने कनिष्क गोल्ड के दफ्तरों और रिहाइशी परिसरों में छापेमारी शुरू कर दी है।
एसबीआइ ने दिया 240 करोड़ का कर्जवर्ष 2008 से शुरू हुए इस घोटाले में दस साल की अवधि में एसबीआइ ने सर्वाधिक कर्ज (240 करोड़ रुपये) दिया। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक (128 करोड़), बैंक आफ इंडिया (46 करोड़), आइडीबीआइ (49 करोड़), सिंडिकेट बैंक (54 करोड़), यूनियन बैंक (53 करोड़), यूको बैंक (45 करोड़), सेंट्रल बैंक (22 करोड़), कारपोरेशन बैंक (23 करोड़), बैंक आफ बड़ौदा (32 करोड़), तमिलनाडु मर्चेंटाइल बैंक (27 करोड़), एचडीएफसी (27 करोड़), आइसीआइसीआइ बैंक (27 करोड़) और आंध्र बैंक से(32 करोड़ रुपये) का कर्ज लिया;
कर्ज 2007 से ही बकाया, कंपनी 2017 में बंद25 मई 2017 को जब बैंकर्स ने कनिष्क के कारपोरेट आफिस का दौरा किया तो फैक्ट्री, शोरूम बंद था। वहां कोई कामकाज नहीं हो रहा था। बाद में जब बैंकर्स दूसरे शोरूम पर पहुंचे तो पता चला कि वे भी बंद है। मद्रास ज्वैलर्स एंड डायमंड मर्चेंटस एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने कहा, 'कंपनी घाटे को सहन नहीं कर पा रही थी और मई 2017 में ही बंद हो गई।' एसबीआइ के लेटर से पता चलता है कि कनिष्क पर लोन 2007 से ही बकाया है। समय बीतने के साथ बैंकों ने कनिष्क के लिए क्रेडिट लिमिट और वर्किंग कैपिटल लोन की लिमिट बढ़ा दी।

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