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 स्वास्थ्य मानकों के आधार पर नीति आयोग ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और उसकी रैंकिंग की रिपोर्ट जारी की है। इसमें चौंकाने वाला तथ्य यह है कि दिल्ली में 21.4 फीसद नवजात बच्चे दुबले व कमजोर हैं।
दिल्ली की हालत खराब- इस मामले में दिल्ली की स्थिति बिहार, झारखंड, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी ज्यादा खराब है। जन्म के समय सामान्य से कम वजन (लो बर्थ वेट) के मामले में 29 राज्यों व सात केंद्र शासित राज्यों की सूची में दिल्ली को आखिरी से चौथे पायदान पर जगह मिल पाई है। यह राजधानी की स्वास्थ्य सुविधाओं व गर्भवती महिलाओं के लिए दिल्ली सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं के पोषण लिए चलाई जाने वाली योजनाओं पर बड़ा सवाल है। इससे स्पष्ट है कि जरूरतमंदों तक सरकारी मदद नहीं पहुंच पा रही है।
क्या कहती है रिपोर्ट- रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में वर्ष 2014-15 में 20.9 फीसद बच्चों का वजन सामान्य (ढाई किलोग्राम) से कम था। इसके अगले साल 2015-16 में यह आंकड़ा बढ़कर 21.4 फीसद हो गया। सबसे ज्यादा दुबले बच्चे दादर और नगर हवेली में (34.7 फीसद), राजस्थान में 25.5 फीसद व दमन और दीव में 24.4 फीसद हैं।
बच्चों की सही देखभाल नहीं होती- रिपोर्ट में कहा गया है कि हरियाणा, पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, राजस्थान, गोवा व दिल्ली सहित चार केंद्र शासित राज्यों में हालात ज्यादा खराब हैं। बच्चों का वजन सामान्य से कम होने के कई कारण होते हैं। इसमें कम उम्र में प्रसव, खराब पोषण, हृदय की बीमारियां, सिलियक बीमारी और बच्चों की अच्छी देखभाल नहीं होना शामिल है।
टीकाकरण के मामले में दस राज्यों से पीछे है राजधानी- टीकाकरण के मामले में भी दिल्ली का रिकॉर्ड उम्मीद के मुताबिक नहीं है। दिल्ली से बेहतर 10 राज्यों के रिकॉर्ड हैं। दिल्ली में 96.3 फीसद बच्चों का टीकाकरण हो सका जबकि केंद्र शासित राज्यों में लक्षद्वीप व अंडमान और निकोबार में सौ फीसद टीकाकरण सुनिश्चित हो सका। 
2015 में आई थी सर्वे रिपोर्ट- साल 2015 में दिल्ली सहित पांच महानगरों की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चों के शारीरिक विकास का सर्वे किया गया था। गैर सरकारी संगठन 'क्राइ चाइल्ड राइट्स एंड यू' द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 50 फीसद बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। सर्वे के दौरान इन बच्चों का वजन कम पाया गया था जिसका कारण यह था कि बच्चों को सरकारी पोषाहार नहीं मिल रहा था। दिल्ली के मुकाबले चेन्नई में झुग्गी बस्तियों के बच्चे अधिक कुपोषित पाए गए थे।
सामने आए तथ्य- यह सर्वे बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता व मुंबई में 1206 बच्चों पर किया गया था। इसमें पाया गया कि था सबसे अधिक चेन्नई में 62.7 फीसद बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इसके अलावा बेंगलुरु में 33 फीसद, कोलकाता में 49 फीसद, मुंबई में 41.30 फीसद बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इन पांचों शहरों में 57 फीसद बच्चों को सिर्फ एक बार टीका लग पाया, जबकि दिल्ली में 31 फीसद बच्चों को सिर्फ एक टीका लगा। यहां 47 फीसद बच्चों को ही विटामिन ए का खुराक मिली। शेष बच्चों को विटामिन ए की खुराक नहीं दी गई। 30 फीसद बच्चों की छह महीने में लंबाई जांच भी नहीं की गई। सर्वे के दौरान 45 फीसद बच्चों का शारीरिक विकास उनकी उम्र के मुताबिक कम पाया गया। 

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