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सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों के अपील के दौरान जमानत पर रिहा हो जाने पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि ये कैसा मामला है जिसमें ट्रायल के दौरान अभियुक्त जेल में रहे और सजा मिलने के बाद रिहा हो गए। कोर्ट ने ये टिप्पणी सोनीपत के एक निजी विश्वविद्यालय में छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में की। हालांकि कोर्ट ने अभियुक्त विकास गर्ग के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट पर फिलहाल रोक लगा दी है।बात ये है कि विश्वविद्यालय में छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। कोर्ट ने दो अभियुक्तों हार्दिक सीकरी और करण छाबड़ा को 20 - 20 साल की कैद और तीसरे अभियुक्त विकास गर्ग को सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। तीनों अभियुक्तों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की और हाईकोर्ट ने अपील विचारार्थ स्वीकार करते हुए अभियुक्तों को जमानत दे दी थी। जिससे वे जेल से रिहा हो गए थे। जबकि तीनों अभियुक्त ट्रायल के दौरान दो साल तक जेल मे रहे थे और उन्हें जमानत नहीं मिली थी।
सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों के अपील के दौरान जमानत पर रिहा हो जाने पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि ये कैसा मामला है जिसमें ट्रायल के दौरान अभियुक्त जेल में रहे और सजा मिलने के बाद रिहा हो गए। कोर्ट ने ये टिप्पणी सोनीपत के एक निजी विश्वविद्यालय में छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में की। हालांकि कोर्ट ने अभियुक्त विकास गर्ग के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट पर फिलहाल रोक लगा दी है।बात ये है कि विश्वविद्यालय में छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। कोर्ट ने दो अभियुक्तों हार्दिक सीकरी और करण छाबड़ा को 20 - 20 साल की कैद और तीसरे अभियुक्त विकास गर्ग को सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। तीनों अभियुक्तों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की और हाईकोर्ट ने अपील विचारार्थ स्वीकार करते हुए अभियुक्तों को जमानत दे दी थी। जिससे वे जेल से रिहा हो गए थे। जबकि तीनों अभियुक्त ट्रायल के दौरान दो साल तक जेल मे रहे थे और उन्हें जमानत नहीं मिली थी।

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