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लखनऊ में ठण्ड और कोहरा बढ़ने से दिल व सांस के मरीजों की संख्या अधीक हो रही है !अस्पतालों की ओपीडी में सांस के मरीजों की संख्या का स्तर बढ़ गया है वही दूसरी ओर 30 - 35 प्रतिशत दिल के मरीजों की संख्या अधीक हुई है अस्पतालों में वेंटिलेटर व आईसीयू के यूनिट भी फूल हो चुके है सांस व दिल के मरीजों की मुसीबते संसाधनों की कमी की वजह से बढ़ गई है ! आईसीयू की जबरदस्त संकट है लखनऊ के बड़े अस्पतालों में सांस व दिल के मरीजों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा तो है पर सारे बेड मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण भरे पड़े है ! इसके कारण गम्भीर स्थिति के मरीजों के इलाज़ में खास असुविधा हो रही है ! मरीजों को इलाज़ के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है और यदि आईसीयू की व्यवस्था हो रही है तो कार्डियर और मानिटर का संकट आ रहा है ऐसे में मरीजों को अधुरा इलाज़ मिलने के कारण मरीजों की दिक्कते बढ़ रही है और अधीक से अधीक मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है ! ऐसे में यदि प्रदूषण का स्तर कम न हुआ तो लोगो को अधीक से अधीक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है ! 

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