डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने हरियाणा सरकार को भी खूब चकमा दिया। पंचकूला स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में पेशी को लेकर हरियाणा सरकार को वह उलझाता रहा। अन्य मौकों पर भी सरकार को गलत सूचनाएं देने की कोशिश की। उसने कोर्ट तक पहुंचने के लिए तीन बार प्लान बदला।
कोर्ट में पेशी की अपनी प्लानिंग के बारे में उसने न तो हरियाणा सरकार के किसी मंत्री को जानकारी दी और न ही किसी अफसर को भरोसे में लिया। गुरमीत और सरकार के बीच संवाद का काम भी उसके खास लोग करते थे। लेकिन उन लोगों ने सरकार तक जितने भी संदेश भिजवाए, उनमें कोई सही नहीं था।
कभी उसने पंजाब के रास्ते पंचकूला कोर्ट में पेश होने की बात कही तो कभी हरियाणा के रास्ते और कभी हवाई मार्ग के जरिये आने की बात कहकर भ्रम बनाया। आधा दर्जन मंत्री भी डेरे में हाजिरी भरने जाते रहे, लेकिन गुरमीत ने अपनी प्लानिंग के बारे में उन्हें भी कुछ नहीं बताया।
गुरमीत के जन्मदिन पर और उसके आगे पीछे के दिनों में भी कुछ मंत्रियों ने डेरा मुखी के कोर्ट में पेश होने के बारे में पूछा था, मगर वह टाल गया था। 24 अगस्त की रात को राम रहीम ने खुद ही अपने कोर्ट में पेश होने की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए दी। डेरा प्रमुख के काफिले में एक रंग की पांच विशेष गाडिय़ां थी। किसी को पता नहीं होता था कि वह किस गाड़ी में है। हरियाणा की खुफिया एजेंसियां इस बात को लेकर भ्रम में रही कि 200 गाडिय़ों के काफिले में शामिल इन पांच गाडिय़ों में से किस गाड़ी में डेरा मुखी है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अनुसार, खुफिया एजेंसी ने अपने माध्यम से दो गाडिय़ों के नंबर सरकार को उपलब्ध कराए। कोर्ट में उन्हीं दो गाडिय़ों को भीतर तक जाने दिया गया। संभावना के अनुरूप डेरा प्रमुख उन्हीं दो गाडिय़ों में से एक से बाहर निकला।
सैकड़ों गाडिय़ों के काफिले की मंजूरी से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोर्ट और डेरा प्रमुख के बीच का मामला था। वह कैसे आता है, यह हम रोक नहीं सकते थे। हमारी प्राथमिकता थी कि किसी तरह डेरा प्रमुख कोर्ट में पेश हो जाए।

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