अमेरिका के बाद अब चीन ने भी अपने रक्षा बजट में करीब सात फीसद से अधिक का इजाफा करने का एलान किया है। वर्ष 2010 के बाद से ही रक्षा बजट में कोई बदलाव नहीं किया गया था, लेकिन अब एक साथ ही सात फीसद का इजाफा किया गया है। हालांकि इसका औपचारिक एलान रविवार को किया जाएगा। इसकी वजह अमेरिका से संबंधों में आई तल्खी को भी माना जा रहा है। साथ ही दक्षिण चीन सागर और ताइवान से संबंधों में आई गरमाहट भी इसकी एक बड़ी वजह रही है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष चीन की अर्थव्यवस्था ने बेहद धीमी रही है और इस दौरान उसका रक्षा बजट भी दूसरे वर्षों के मुकाबले कम ही रहा था। हालांकि इसकी घोषणा रविवार को की जाएगी।
माना जा रहा है कि चीन अपने रक्षा बजट में इजाफा कर अपने विरोधियों को एक मैसेज देना चाहता है। देश के सरकार अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी हाल ही में चीन के रक्षा बजट को बढ़ाने की अपील की थी। हालांकि अखबार का कहना था कि देश का रक्षा बजट कम से कम अमेरिका के बराबर बढ़ना ही चाहिए। अखबार ने दो वरिष्ठ जनरल के हवाले से कहा था कि अमेरिका की बराबरी करने के लिए चीन को कम से कम बारह फीसद तक अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी करनी ही चाहिए।रक्षा बजट में सात फीसद से अधिक के इजाफे के बाद भी सेना के अधिकारी इससे खुश नहीं हैं। अधिकारियों का यहां तक कहना है कि इस फैसले से जवान भी नाखुश हैं। ससंद के प्रवक्ता ने इस बजट में इजाफे की जानकारी देते हुए कहा कि चीन देश के जीडीपी का करीब 1.3 फीसद खर्च रक्षा क्षेत्र में होता है। पिछले कुछ वर्षों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। मौजूदा वर्ष में चीन ने करीब 6.5 की अार्थिक विकास दर पाने का लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष यह 6.5-7 रही है।

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